नोटिस, सुनवाई और तर्क के बिना नहीं हटाया जाएगा मतदाता सूची से नाम

बिहार में एसआईआर मामला: चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा

नई दिल्ली। बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) मामले में चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है। आयोग ने अपने जवाब में कहा कि बिहार में किसी भी पात्र मतदाता का नाम बिना पूर्व सूचना या बिना सुनवाई का अवसर दिए मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा। योग्य मतदाताओं का नाम फाइनल मतदाता सूची में शामिल करने के हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।

बिहार में चल रहे एसआईआर में गलत तरीके से नाम हटाए जाने के प्रयासों को रोकने के लिए सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने आरोप लगाया कि 65 लाख मतदाताओं के नाम गलत तरीके से सूची से बाहर किए गए और पारदर्शिता के मुताबिक मतदाता सूची प्रकाशित नहीं की गई। सुप्रीम कोर्ट ने 6 अगस्त को निर्वाचन आयोग को हलफनामा दाखिल कर स्थिति साफ करने का आदेश दिया था। अब इस मामले में 13 अगस्त को सुनवाई होगी।

चुनाव आयोग ने हलफनामे में कहा कि एसआईआर का पहला चरण पूरा हो चुका है और 1 अगस्त 2025 को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई है। यह चरण बूथ स्तर अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा घर-घर जाकर मतदाताओं के नाम और फॉर्म जमा करवाने के बाद पूरा हुआ। 7.89 करोड़ मतदाताओं में से 7.24 करोड़ लोगों ने अपने दस्तावेज जमा किए हैं। इसके लिए 38 जिला निर्वाचन पदाधिकारी, 243 निर्वाचन पंजीकरण पदाधिकारी, 77,895 बीएलओ, 2.45 लाख स्वयंसेवक और 1.60 लाख बूथ स्तर एजेंट इस काम में सक्रिय रहे। राजनीतिक दलों को समय-समय पर छूऐ हुए मतदाताओं की सूची दी गई। प्रवासी मजदूरों के लिए 246 अखबारों में विज्ञापन, ऑनलाइन-ऑफलाइन फॉर्म सुविधा, शहरी निकायों में विशेष कैंप, युवाओं के लिए अग्रिम पंजीकरण और वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों की सहायता के लिए 2.5 लाख स्वयंसेवक तैनात किए गए।

हलफनामे में कहा गया है कि मतदाता सूची से किसी भी मतदाता का नाम को हटाने से पहले नोटिस, सुनवाई और सक्षम अधिकारी का कारणयुक्त आदेश अनिवार्य है। 1 अगस्त से 1 सितंबर 2025 तक दावे-आपत्तियां दर्ज की जा सकती हैं। सभी दावों का निस्तारण सात कार्यदिवस में किया जाएगा। अपील ईआरओ और फिर मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास होगी।