तेहरान। ईरान इस समय इतिहास की सबसे भीषण गर्मी और सूखे से जूझ रहा है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि सरकार को राजधानी तेहरान सहित 22 प्रांतों में सरकारी कार्यालयों को बंद करने का आदेश देना पड़ा है।
सरकारी अधिकारियों ने बताया कि यह निर्णय तब लिया गया जब देशभर में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया और कुछ क्षेत्रों में पारा 50 डिग्री सेल्सियस के करीब दर्ज किया गया। इस अत्याधिक गर्मी के साथ-साथ देश अभूतपूर्व जल संकट से भी जूझ रहा है। पिछले जलवर्ष की तुलना में इस वर्ष वर्षा में 40 फीसद की कमी आई है, जिससे जलाशयों और बांधों में जलस्तर बेहद कम हो गया है। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, देश के बांध अपनी कुल क्षमता का केवल 44 प्रतिशत ही भर पाए हैं। विशेष रूप से दक्षिणी प्रांतों जैसे होरमोजग़ान और फार्स में जलस्रोत लगभग समाप्त हो चुके हैं।
तेहरान सहित कई शहरों में पिछले कुछ दिनों से घंटों तक पानी की आपूर्ति बाधित रही है। स्थानीय लोगों ने शिकायत की है कि उन्हें एक दिन में कई-कई घंटे बिना पानी के रहना पड़ रहा है।
सरकार ने बिजली की आपूर्ति में भी कटौती शुरू कर दी है, ताकि सिस्टम पर अधिक दबाव न पड़े। ऊर्जा मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से एसी, कूलर और अन्य बिजली उपकरणों का प्रयोग न करें। जलवायु परिवर्तन और लगातार घटती वर्षा ने ईरान की स्थिति को और अधिक संकटपूर्ण बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले महीनों में स्थिति और भी विकराल हो सकती है।

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