भोपाल। मध्यप्रदेश में सरकारी विभागों में ज्यादातर कार्य आउटसोर्स कर्मचारी के जिम्मे चल रहा है। बिजली जैसे महत्वपूर्ण विभाग में प्रदेश में 55 से 60 हजार आउटसोर्स कर्मचारी व्यवस्थाओं का सुचारू संचालन वर्षों कर रहे हैं। अब ऊर्जा विभाग की ओर से 49 हजार पदों पर नई भर्ती की घोषणा के साथ ही आउटसोर्स कर्मचारियों ने एकजुटता दिखाते हुए गुहार लगाई है कि वह वर्षों से पूरी क्षमता के साथ कार्य कर रहे हैं, उन्हें 50 फीसदी आरक्षण दिया जावे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बिजली कंपनियों में नई भर्ती के लिए कैबिनेट बैठक में निर्णय ले लिया है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्नसिंह तोमर बिजली कर्मचारियों की भर्ती को लेकर लगातार प्रयास कर रहे थे। इधर बिजली कंपनियों में लगातार कर्मचारी सेवानिवृत्ति हो रहे हैं और काम का बोझ सीधा आउटसोर्स कर्मचारी पर होने से नई समस्याओं का सृजन हो रहा है। मध्यप्रदेश में 6 बिजली कंपनियां हैं। यहां पर तकरीबन 55 से 60 हजार आउटसोर्स कर्मचारी अलग-अलग पदों पर सेवाएं दे रहे हैं। इनमें 60 फीसदी पद तो ऐसे हैं, जो लाइन स्टाफ और लाइनमैन जैसे महत्वपूर्ण कड़ी का हिस्सा है। मध्यप्रदेश बाह्य स्त्रोत विद्युत कर्मचारी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष शिवसिंह राजपूत ने बताया कि हजारों की संख्या में ऐसे आउटसोर्स कर्मचारी हैं, जो 5, 10 और 15 साल से बिजली कंपनी में सेवाएं दे रहे हैं। दिन-रात उपभोक्ताओं की समस्याओं को हल करने में तत्पर रहते हैं। अब नई भर्ती में हमको अनदेखा किया जा रहा है। मुख्यमंत्री, ऊर्जामंत्री से कर्मचारियों ने गुहार लगाई है कि उन्हें नई भर्ती में 50 फीसदी आरक्षण दिया जाए। आउटसोर्स कर्मचारी संगठन ने मांग पत्र में यह भी उल्लेख किया कि यूपी और हरियाणा की तर्ज पर आउटसोर्स कर्मचारी कल्याण बोर्ड का गठन मध्य प्रदेश में किया जाना चाहिए।

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