मुंबई
महाराष्ट्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजीत पवार द्वारा संभाजी महाराज को लेकर दिये गए एक बयान के बाद राज्य की सियासत में बवाल मचा हुआ है। यह बवाल कुछ कम होता इसके पहले ही एनसीपी के पूर्व मंत्री और विधायक डॉ जितेंद्र आव्हाड ने भी एक विवादित बयान दिया है। अब आव्हाड के बयान पर महाविकास अघाड़ी में उनके सहयोगी उद्धव ठाकरे गुट ने अपना कड़ा ऐतराज़ जताया है। अंबादास दानवे ने स्पष्ट किया कि इस मामले में उद्धव ठाकरे गुट और एनसीपी (NCP) के विचार बिल्कुल अलग हैं। उद्धव ठाकरे गुट के इस रुख से महाविकास अघाड़ी के इन दोनों दलों में मतभेद और टकराव की स्थिति बनती हुई नजर आ रही है। अब उन दोनों विवादित बयानों को भी जान लीजिए जो अजीत पवार और जितेंद्र आव्हाड के लिए मुसीबत का सबब बने हुए हैं।
नागपुर विधानसभा के शीतकालीन अधिवेशन सत्र में अजीत पवार ने यह कहा था कि छत्रपति शिवाजी महाराज हिंदवी स्वराज्य रक्षक थे, उन्हें धर्मवीर कहना ठीक नहीं होगा। वहीं पूर्व कैबिनेट मंत्री जितेंद्र आव्हाड ने यह बयान दिया है कि औरंगजेब हिंदू विरोधी नहीं था। अगर वह हिंदू विरोधी होता तो जिस जगह पर छत्रपति संभाजी महाराज की आंखें निकाली गईं। वहां मौजूद विष्णु मंदिर को भी वह तोड़ देता। अब इस बयान के बाद महाराष्ट्र में एनसीपी के इन दोनों नेताओं के खिलाफ शिंदे गुट और बीजेपी द्वारा जमकर विरोध प्रदर्शन शुरू है।
अंबादास दानवे भी विवादों में घिरे
उद्धव गुट के नेता और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष अंबादास दानवे ने जहां छत्रपति संभाजी महाराज के मुद्दे पर जितेंद्र आव्हाड पर निशाना साधा है। वहीं वह खुद भी अपने वक्तव्य के दौरान विवादों में घिर गए। दरअसल अंबादास दानवे ने जितेंद्र आव्हाड पर टिप्पणी करते हुए छत्रपति संभाजी महाराज के लिए एक शब्द का इस्तेमाल किया। अब इस शब्द को लेकर भी महाराष्ट्र में सियासत शुरू हो चुकी है। बीजेपी के प्रदेश महासचिव संजय केनेकर ने भी दानवे पर निशाना साधा है। दरअसल, दानवे ने यह कहा था कि औरंगजेब क्रूर और हिंदू विरोधी था। उसी ने संभाजी महाराज का वध किया था। अब इसी वध शब्द पर दानवे की भी मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही हैं।

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