इंदौर
गेहूं के दाम बीते दिनों में सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गए हैं। दक्षिण भारत में 3400 रुपये क्विंटल के स्तर को छू लिया है। वहां की मिलों को मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब या हरियाणा से पर्याप्त गेहूं ही नहीं मिल पा रहा है। फिलहाल वे उप्र के गेहूं के भरोसे है। गेहूं के दामों में बीते महीने में अप्रत्याशित तेजी आ चुकी है। इसके पीछे की मुख्य वजह तो त्योहारी सीजन में भी ओपन मार्केट (ओएमएसएस) में सरकार द्वारा गेहूं की बिक्री नहीं करना है। हालांकि असल वजह ये है कि गेहूं के उत्पादन के मामले में सरकार का गणित और आंकलन दोनों फेल हो चुका है।
पीडीएस गेहूं और आटा बिक्री पर जोर
सरकार ने दावा किया था कि इस साल गेहूं उत्पादन रिकॉर्ड 113.29 मिलियन टन हुआ है। जबकि बाजार की स्थिति देखकर जानकार कह रहे हैं कि असल उत्पादन इससे कहीं नीचे हैं। दूसरी ओर अब सरकार अब भी दामों पर नियंत्रण की बजाय राजनीतिक कदम में जुटी है। सरकार का ध्यान अब भी ओपन मार्केट सेल पर नहीं है। बल्कि चुनावी गणित देखते हुए पीडीएस में गेहूं और आटा बिक्री पर जोर लगा रही है।
हालांकि इससे बाजार के दामों पर लंबे समय में कोई खास फर्क पड़ता नहीं दिख रहा है। स्थानीय बाजार में डर है कि सरकार ने अब भी बिक्री पर ध्यान नहीं दिया तो आटा-गेहूं की महंगाई और बढ़ेगी। दरअसल मिलों ने बीते महीने में सरकारी बिक्री की उम्मीद में माल नहीं पकड़ा। उनके पास अब स्टाक कम है। किसान के पास भी ज्यादा माल नहीं है।

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