नई दिल्ली
चीन ने हाल ही में डोकलाम में अपनी गतिविधियां बढ़ाई हैं। इसके बाद भारतीय सेना भी दोगुनी तैनाती के साथ तैयार है। भारतीय सेना की तरफ से कई बार कहा गया है कि चीन की गतिविधियां अप्रत्याशित रहती हैं। चीन की इस तरह की हरकतों को देखकर भारत मु्ंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है। इसी श्रृंखला में भारतीय सेना ने पश्चिम बंगाल में 10 दिन का युद्धाभ्यास किया। इस संयुक्त युद्धाभ्यास के जरिए भारत ने अपनी ताकत को परखा है। इसका उद्देश्य ही यही था कि सुरक्षाबल नए हथियारों के इस्तेमाल के लिए तैयार रहें।
भारतीय सेना ने यह एक्सरसाइज सिलिगुड़ी कॉरिडोर के पास की है। बताते चलें कि चीनी सेना जामफेरी रिज तक अगर पहुंच जाती है तो सिलिगुड़ी कॉरिडोर पर खतरा मंडराने लगेगा। इसलिए यह इलाका युद्ध के नजरिए से अहम है। इसीलिए इसे युद्धाभ्यास के लिए चुना गया था। इसे इलाके को चिकन नेक कहा जाता है क्योंकि यह संकरा रास्ता पूर्वोत्तर भारत को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ता है।
इस युद्धाभ्यास में सेनाओं का मोबलाइजेशन, सिविल डिफेंस, सिविल ऐडमिनिस्ट्रेशन, पुलिस और सीएपीएफ के साथ समन्यव किया गया। इसके अलावा तीस्त फील्ड फायरिंग रेंज में इंटीग्रेटेड फायर पावर एक्सरसाइज की गई। बता दें कि युद्ध के समय सभी एजेंसियों की भागेदारी और आपसी समन्वय बड़ी भूमिका निभाता है। इस युद्धाभ्यास के अहम उद्देश्यों में यह भी शामिल था। इस युद्धाभ्यास में लैटेस्ट जनरेशन के फाइटर एयरक्राफ्ट, हेलिकॉप्टर, टैंक, आर्टिलरी गन, इनफैंट्री मोर्टार, नए जनरेशन के इन्फैंट्री वेपन और नेटवर्क इन्वायरमेंट के हथियारों का अभ्यास किया गया।
इसमें भारत में नए शामिल किए गए देसी हथियारों को प्राथमिकता दी गई। लेफ्टिनेंट जनरल आरपी कालिटा की निगरानी में फायर एक्सरसाइज की गई। इसके अलावा बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी और सिविल ऐडमिनिस्ट्रेशन के अधिकारी भी मौजूद थे। बता दें कि कुछ दिन पहले सेना प्रमुख ने का था कि चीन पूर्वी सेक्टर में एलएसी की दूसरी तरफ तैनाती बढ़ा रहा है। भारत हर मोर्चे पर चीन को टक्कर देने के लिए तैयार है। बीते दिनों तवांग सेक्टर में भी चीनी सैनिकों के साथ हाथापाई में भारतीय सैनिकों ने उन्हें उलटे पांव लौटने पर मजबूर कर दिया था।

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