कुछ लोग तो अपनी लाइफस्टाइल की वजह से रात में जल्दी नहीं सो पाते है, तो कुछ लोग मोबाइल की लत की वजह से रात में ढंग से सो नहीं पाते है. जिसकी वजह से उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. वहीं हाल ही में एक स्टडी में खुलासा हुआ है कि जो लोग रात में देर से सोते है उन लोगों में डायबिटीज 2 का 46 फीसदी रिस्क ज्यादा बढ़ जाता है. नींद की खराब क्वालिटी के साथ साथ गलत लाइफस्टाइल डायबिटीज के रिस्क को बढ़ाती हैं. आइए आपको बताते है इसके बारे में.
टाइप 2 डायबिटीज का खतरा
हाल ही में एक स्टडी में खुलासा हुआ है कि जो लोग रात में देर तक जागते हैं, उनके अंदर टाइप 2 डायबिटीज का खतरा ज्यादा होता है. वहीं स्टडी में लोगों को बांटा गया, जिनका वजन ज्यादा था.इन लोगों को तीन भागों में बांटा गया. पहला, जल्दी उठने वाले (अर्ली क्रोनोटाइप), दूसरा औसत समय (मिडिल क्रोनोटाइप) पर उठने वाले और तीसरा देर से उठने (लेट क्रोनोटाइप) वाले.
देर से सोने वाले की बायो क्लॉक में गड़बड़
हाल ही में खुलासा हुआ कि रात में देर से सोने वालों की बायो क्लॉक गड़बड़ हो जाती है जिससे इनके शरीर में टाइप 2 डायबिटीज और मेटाबॉलिज्म संबंधी परेशानियां पैदा हो सकती हैं. रात में देर से सोने वालों को होने वाली परेशानियों में हाई बीएमआई, बैली फैट, फैटी लिवर और आंत में फैट जमना शामिल हैं. लेट क्रोनोटाइप वालों में मिडिल क्रोनोटाइप वालों की तुलना में डायबिटीज टाइप 2 होने का रिस्क बढ़ जाता है. इसके पीछे शरीर में फैट का बढ़ना, आंत की चर्बी का बढ़ना और फैटी लिवर शामिल है.

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