नई दिल्ली
जैसे ही नए शैक्षणिक सत्र के लिए स्टूडेंट्स के स्वागत को स्कूल फिर से खुले, पैरंट्स ने फीस में बढ़ोतरी पर चिंता व्यक्त की है। लोकल सर्किल्स की ओर से किए गए एक सर्वे से पता चला है कि दो में से एक पैरंट्स ने बताया कि पिछले दो साल में फीस में 30% या उससे अधिक की बढ़ोतरी हुई है। 8 प्रतिशत पैरेंट्स ने माना कि कुल फीस में 50% से अधिक की वृद्धि हुई है, जबकि 42% ने 30-50 प्रतिशत की वृद्धि का अनुभव किया। उन्होंने कहा कि सत्र की शुरुआत में नई किताबों की अतिरिक्त लागत और स्कूल के अन्य खर्चों से यह और बढ़ गया।
कोविड में कम हुई थी फीस
कोविड महामारी के दौरान, 2020 से 2022 तक, कई राज्य सरकारों ने फीस को सीमित करने के लिए कदम उठाया था क्योंकि बच्चे ऑनलाइन क्लास ले रहे थे। हालांकि, राहत अस्थायी थी क्योंकि महामारी कम होने के बाद स्कूलों ने फीस बढ़ा दी। आंकड़ों से पता चलता है कि कई शहरों में प्रतिष्ठित निजी स्कूलों की वार्षिक फीस अब 1 लाख से 4 लाख रुपये के बीच है। वहीं कुछ शहरों में यह 50,000 से 2 लाख रुपये के बीच है। सर्वे में भारत के 312 जिलों के पैरंट्स की 27,000 प्रतिक्रियाएं शामिल थीं। इनमें से 66% पुरुष और 34% महिलाएं थीं।
क्या आपकी राज्य सरकार स्कूलों द्वारा बढ़ाई गई फीस को कम करने या रोकने में प्रभावी रही?
23% ने कहा, सरकार ने कार्यवाही की
45% बोले, वे सिर्फ बात करते रहे, कोई असर नहीं हुआ
22% ने कहा कि उन्होंने तो इस मुद्दे को उठाया तक नहीं
6% ने कहा, उनके राज्य में बढ़ती स्कूल फीस का कोई मुद्दा ही नहीं
4% बोले, कुछ कह नहीं सकते

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