धर्मशीला नारायण सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ. समीर कुब्बा ने कहा कि ऐसी घटनाएं हमें शुरुआती अवस्था में नियमित जांच कराने की आवश्यकता की याद दिलाती हैं. उन्होंने आगे कहा कि शहरी क्षेत्रों में लाइफस्टाइल फैक्टर्स की महत्वपूर्ण भूमिका के साथ, कोरोनरी धमनी की बीमारी और उसके बाद होने वाली दिल की बीमारी का प्रसार बढ़ रही है. इससे निपटने का मुख्य उपाय दिल के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना और जल्द से जल्द इलाज शुरू करना है.
युवाओं में स्ट्रोक के कारण
* असामान्य मोटापा, गतिहीन लाइफस्टाइल
* हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल और धूम्रपान
* कुछ विशेष मेडिकल कंडिशन, जेनेटिक्स प्रवृत्तियां और यहां तक कि पर्यावरण फैक्टर
* तनाव, नींद की कमी, मोटापे के कारण होने वाली ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के बढ़ते मामले, स्ट्रोक के रिस्क फैक्टर में शामिल हैं, जिन पर आमतौर पर ध्यान नहीं दिया जाता है.
डॉक्टरों की सलाह
* रोजाना 30-45 मिनट पैदल चलें
* ध्यान करें.
* डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल के लिए नियमित दवाएं लें.
* शरीर की शारीरिक क्षमता से अधिक व्यायाम न करें.
* नियमित जांच कराएं.
* साल में एक बार पूरे शरीर की जांच कराएं.
* 6-8 घंटे की नींद लें.

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