भोपाल
लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर लगातार धरना प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों की कई मांगें अधूरी रह गई। कर्मचारी संगठनों की ओर से इसे लेकर लगातार धरना प्रदर्शन किया जा रहा था। सोमवार से आचार संहिता लगने के बाद अब धरना, प्रदर्शन, आंदोलन बंद हो जाएंगे। ऐसे में कर्मचारियों की कई मांगें पूरी नहीं हो पाई।
मप्र कर्मचारी मंच की ओर से स्थायी कर्मी, दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी, अंशकालीन कर्मचारी, सुरक्षा, वन सुरक्षा श्रिमकों ने अपनी 12 सूत्रीय मांगों को लेकर मंत्रालय के समक्ष प्रदर्शन किया और अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन मंत्रालय के मुख्य द्वार पर चस्पा किया। मंच के अशोक पांडे ने बताया कि कर्मचारियों की मांगों का निराकरण नहीं हो पाया है, अपनी मांगों को लेकर कर्मचारी सालों से लड़ाई लड़ रहे हैं।
कर्मचारी जगत में निराशा
तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रदेश सचिव उमाशंकर तिवारी ने बताया कि अधिकांश संगठनों द्वारा अपने मांग पत्र एवं धरना प्रदर्शन के माध्यम से सरकार तक लगातार मांग पहुंचाई जा रही थी। कर्मचारी संगठन एवं कर्मचारियों को उम्मीद थी आचार संहिता लगने से पहले सरकार कर्मचारियों की मुख्य मांगों को जरूर पूरा करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। आचार संहिता लगने के बाद कर्मचारियों में मांगे पूरा नहीं होने पर मायूसी है।
कई कर्मचारी संगठनों की ओर से किए जा रहे थे प्रदर्शन
शहर में पिछले दो माह से लगातार विरोध प्रदर्शन का सिलिसला जारी था। इसके तहत सत्याग्रह, रैली, काम बंद आंदोलन सहित अलग-अलग तरीकों से विरोध प्रदर्शन किया जा रहा था। इसमें अधिकारी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा, तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ, स्थायी कर्मी कल्याण संगठन, एनएचएम संविदा आउटसोर्स कर्मचारी संघ, आयुष चिकित्सक महासंघ सहित अन्य संगठन विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।
साढ़े 5 लाख पेंशनरों के साथ छल किया…
नियमित कर्मचारी संवर्ग से जुड़े कई कर्मचारी संघों ने राज्य सरकार के रवैये पर सवाल उठाए हैं। इन कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि हमें उम्मीद थी कि आचार संहिता लगने के पहले सरकार कई मांगें पूरी करेगी, लेकिन निराशा ही हाथ लगी। अधिकारी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के संरक्षक एवं अपाक्स के प्रदेश अध्यक्ष भुवनेश कुमार पटेल ने कहा कि पुरानी पेंशन बहाली, वेतन विसंगति दूर करने, ग्रेड पे बढ़ाने जैसी कई महत्वपूर्ण मांगे पूरी नहीं की गईं। तृतीय वर्ग से जुड़े कर्मचारी नेता उमाशंकर तिवारी ने कहा कि लिपिकों को मंत्रालय के समान ग्रेड पे का लाभ देने, पदोन्नति पर 7 साल से लगी रोक हटाने जैसी कई मांगें पूरी नहीं हो सकीं। पेंशनर संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी गणेशदत्त जोशी, आमोद सक्सेना और राजेश चौबे ने कहा कि प्रदेश के साढ़े पांच लाख पेंशनरों के साथ छल किया गया है। छूट और महंगाई राहत का बकाया नहीं दिया।

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