भिलाई
भिलाई स्थित यस बैंक में 165 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेनदेन के मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीबीआइ की जांच के तरीके पर सवाल उठाए गए। याचिकाकर्ता प्रभुनाथ मिश्रा के अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि सीबीआइ की जांच पिछले सात से आठ महीने में बैंक खातों के केवाईसी तक ही सीमित रही है। अब तक न तो सभी लेनदेनकर्ताओं की भूमिका स्पष्ट की गई है और न ही करोड़ों रुपये के नकद लेनदेन के पीछे का कारण न्यायालय के सामने रखा गया है।
इस मामले में पूर्व मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा के विस्तृत आदेश के बाद जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ताओं ने न्यायालय में दलील दी कि जिस तरह पहले राज्य पुलिस की जांच में खानापूर्ति की गई, लगभग वैसा ही रवैया सीबीआइ भी अपना रही है। अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि खाते में करोड़ों रुपये किसके कहने पर जमा किए गए और बाद में यह रकम कहां गई।
साथ ही इस पूरे मामले में किन राजनेताओं और उद्योगपतियों की भूमिका है, इसकी भी जानकारी सामने नहीं आई है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने अनिमेष सिंह की ओर से दर्ज कराई गई एफआइआर पर कार्रवाई नहीं होने का मुद्दा भी उठाया।
उन्होंने कहा कि हितेश चौबे,बाला चौहान और अनिमेष सिंह के बीच संबंधों को लेकर भी जांच में स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। इन बिंदुओं पर हाई कोर्ट पहले ही आपत्ति जताते हुए सीबीआइ के अधिवक्ता को शपथपूर्वक जानकारी देने के निर्देश दे चुका है। प्रकरण की अगली सुनवाई 13 जनवरी को होगी।
सीलबंद लिफाफे में पेश की अंतरिम रिपोर्ट
तीन नवंबर 2026 को सीबीआइ के अधिवक्ता ने हाई कोर्ट में सील बंद लिफाफे में जांच रिपोर्ट पेश की। सीबीआइ की ओर से बताया गया कि यह अंतरिम रिपोर्ट है और जांच अभी पूरी नहीं हुई है। न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास और न्यायमूर्ति सुधीर कुमार की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान विदेश से आई रकम का संबंध किसी बड़े आर्थिक रैकेट से होने की आशंका पर जानकारी मांगी है।
न्यायालय ने यस बैंक अध्यक्ष के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चल रहे करोड़ों रुपये के कथित फर्जीवाड़े के मामले में वर्तमान प्रकरण से तार जुड़े होने पर भी सीबीआइ से जवाब मांगे हैं। सीबीआइ को इस संबंध में शपथपत्र प्रस्तुत कर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सतीश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि हाई कोर्ट मामले में तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने अनिमेष सिंह और हितेश चौबे से संबंधित दोनों एफआइआर पर ठोस कार्रवाई और जब्ती नहीं होने को भी आपत्तिजनक बताया। मामले की अगली सुनवाई 13 जनवरी 2027 को होगी।

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