October 27, 2026

भुवनेश्वर कुमार के लिए न्यूजीलैंड सीरीज बनी बड़ी चुनौती, 3 मैच में सिर्फ 1 विकेट; करियर पर उठे सवाल

वेलिंगटन
भारतीय टीम के अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार के लिए न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज अब तक उम्मीद के मुताबिक नहीं रही है। लंबे समय बाद टीम में वापसी करने वाले भुवनेश्वर अपनी गेंदबाजी से प्रभाव छोड़ने के लिए संघर्ष करते नजर आए हैं। 3 मैचों में उनके नाम सिर्फ एक विकेट है, जबकि रन खर्च करने के मामले में भी उनका प्रदर्शन चिंता बढ़ाने वाला रहा है। ऐसे में चिंता की बात यह है कि जिस सीरीज को उनकी कमबैक सीरीज माना जा रहा था। वही सीरीज कहीं उनके करियर की आखिरी सीरीज न बन जाए।

न्यूजीलैंड के खिलाफ अब तक खेले गए 3 मुकाबलों में भुवनेश्वर कुमार ने कुल 12 ओवर गेंदबाजी की है। इस दौरान उन्होंने 139 रन खर्च किए और केवल एक विकेट हासिल कर पाए। एक अनुभवी गेंदबाज से जिस तरह के प्रदर्शन की उम्मीद की जाती है, ये आंकड़े फिलहाल उससे मेल नहीं खाते।

न विकेट मिल रहे और न ही रन रुक रहे
भुवनेश्वर की पहचान नई गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने और अपनी सटीक लाइन-लेंथ से बल्लेबाजों को परेशान करने वाले गेंदबाज के रूप में रही है। लेकिन इस सीरीज में वह विपक्षी बल्लेबाजों पर लगातार दबाव बनाने में सफल नहीं रहे हैं। विकेट हासिल नहीं कर पाने के साथ रन रोकने में भी उनकी परेशानी साफ दिखाई दे रही है।

पावरप्ले और डेथ ओवर में भी फेल
टी20 क्रिकेट में गेंदबाजों के लिए रन रोकना और विकेट निकालना दोनों अहम होते हैं। खासकर पावरप्ले और डेथ ओवरों में गेंदबाज के प्रदर्शन का मुकाबले पर सीधा असर पड़ता है। भुवनेश्वर जैसे अनुभवी खिलाड़ी से टीम को इन परिस्थितियों में बेहतर नियंत्रण की उम्मीद रहती है। तीन मैचों में 12 ओवर के दौरान 139 रन देना उनके लिए चिंता का विषय है। इस दौरान केवल एक विकेट मिलने से विपक्षी टीम को रोकने में उनकी भूमिका भी सीमित रही है।

अनुभव के बावजूद नहीं मिल रहे विकेट
भुवनेश्वर कुमार की सबसे बड़ी ताकत उनकी स्विंग और गेंद पर नियंत्रण रहा है। वह नई गेंद से शुरुआती विकेट निकालने के अलावा अपनी विविधताओं से बल्लेबाजों को चकमा देने की क्षमता रखते हैं। लेकिन मौजूदा सीरीज में वह इन खूबियों का अपेक्षित फायदा नहीं उठा पाए हैं। टी20 फॉर्मेट में बल्लेबाज पहली गेंद से ही आक्रामक रुख अपनाते हैं। ऐसे में गेंदबाज को अपनी लेंथ में बदलाव करने, धीमी गेंदों का सही इस्तेमाल करने और बल्लेबाज की कमजोरी पहचानने की जरूरत होती है। भुवनेश्वर के लिए भी इन पहलुओं में सुधार करना अहम होगा, ताकि वह रन गति पर लगाम लगाने के साथ विकेट हासिल कर सकें।

करियर की आखिरी सीरीज खेल रहे भुवी?
भुवनेश्वर कुमार के लिए यह सीरीज अपनी उपयोगिता साबित करने का मौका है। लेकिन लगातार महंगे साबित होने और विकेट नहीं निकाल पाने से चयनकर्ताओं के सामने दूसरे विकल्पों पर विचार करने की गुंजाइश बढ़ सकती है। भारतीय टीम के पास तेज गेंदबाजी में कई विकल्प मौजूद हैं, ऐसे में किसी भी खिलाड़ी के लिए अपनी जगह बनाए रखने के लिए निरंतर प्रदर्शन करना जरूरी है। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि न्यूजीलैंड के खिलाफ यह सीरीज भुवनेश्वर के लिए आखिरी मौका साबित होगी। टीम में चयन केवल तीन मैचों के आंकड़ों पर निर्भर नहीं करता।