October 16, 2026

विद्यार्थियों का ज्ञान और कौशल देश के विकास की अमूल्य निधि : राज्यपाल पटेल

भोपाल
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने विद्यार्थियों से आह्वान किया है कि उन्होंने जो ज्ञान हासिल किया है, वह उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि भर नहीं है। यह देश के विकास की अमूल्य निधि है। दीक्षांत भावी जीवन की नई जिम्मेदारियों और नई संभावनाओं का महत्वपूर्ण पड़ाव है। राज्यपाल पटेल गुरूवार को ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के द्वादश (12वें) दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि विश्वविद्यालय में आप सबने जो सीखा है, उन्हें आचरण में भी उतारें। राज्यपाल ने कहा कि अपने ज्ञान का उपयोग कृषि की ऐसी व्यवस्था में करें, जो पर्यावरण के अनुकूल हो और देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कर भावी पीढ़ियों का भविष्य संवारे। दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदकों सहित कुल 666 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं।

राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के दत्तोपंत ठेंगड़ी सभागार में आयोजित हुए दीक्षांत समारोह में विशिष्ट अतिथि दिनेश कुलकर्णी, विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला, प्रमंडल के सदस्यगण, कुलसचिव अजय कौशल एवं विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष मंचासीन थे। इस अवसर पर राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय की कुलगुरू प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे तथा जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. दिवाकर सिंह राजपूत भी मौजूद थे।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि कृषि शिक्षा की सार्थकता देश की मिट्टी, जल, पर्यावरण और खाद्य सुरक्षा के संरक्षण के साथ करोड़ों किसानों की खुशहाली सुनिश्चित करने में है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कृषि क्षेत्र तेजी से बदल रहा है। बदलाव के इस दौर में विज्ञान, तकनीक और नए विचारों के सहारे खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। जलवायु परिवर्तन, घटती जोत, मिट्टी की सेहत और जल संकट जैसी वर्तमान चुनौतियों के समाधान खोजकर उत्पादन की अस्थिरता को खत्म करना होगा।

राज्यपाल पटेल ने कृषि विद्यार्थियों से कहा कि उनकी प्रतिभा की परीक्षा प्रयोगशाला के शोध पत्रों में नहीं अपितु ड्रोन कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव तकनीक जैसी आधुनिक विधियों को खेतों तक ले जाने में है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में कृषि, शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। विद्यार्थियों से कहा कि कृषि शिक्षा को व्यवहारिक ज्ञान से जोड़कर किसानों की खुशहाली के लिये नए अवसर सृजित कर विकसित भारत के निर्माण में योगदान दें।

राज्यपाल पटेल ने विद्यार्थियों को उनके स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि फास्ट फूड के सेवन से बचें। मिलेट्स (मोटे अनाज) को अपने भोजन में प्रमुख स्थान दें। स्वस्थ रहकर ही सफल जीवन के साथ-साथ समाज और  देश के निर्माण में योगदान दिया जा सकता हैं। राज्यपाल पटेल ने उपाधि प्राप्त सभी विद्यार्थियों को बधाई तथा शुभकामनायें दीं। उन्होंने विद्यार्थियों में शिक्षा, प्रतिभा और समर्पण से कृषि क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर विकसित भारत के संकल्प को गति देने का भरोसा भी जताया।

समारोह के विशिष्ट अतिथि कुलकर्णी ने कहा कि खेती केवल व्यवसाय ही नहीं, हमारी संस्कृति की जीवन पद्धति भी है। उन्होंने भारतीय संस्कृति में समाहित पंच महाभूतों के साथ सामंजस्य स्थापित कर किसानों को खेती के लिये प्रोत्साहित करने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया।

दीक्षांत समारोह में कुलगुरू प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला ने दीक्षोपदेश दिया। विश्वविद्यालय का प्रगति प्रतिवेदन और विश्वविद्यालय में हुए उन्नत कृषि के नवाचारों की जानकारी दी।  दीक्षांत समारोह में गत 01 अक्टूबर 2025 से 30 सितम्बर 2026 के बीच उपाधि पूर्ण करने वाले विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें स्नातक के 345, स्नातकोत्तर के 294 एवं पीएचडी के 27 विद्यार्थियों सहित कुल 666 विद्यार्थियों को मिली उपाधि शामिल हैं।

कृषि महाविद्यालय परिसर में स्थापित यूनिट का किया शुभारंभ
राज्यपाल पटेल ने गुरुवार को कृषि महाविद्यालय परिसर स्थित सीएआईई (एग्रीकल्चर इंक्यूबेशन एण्ड एंटरप्रेन्योरशिप) में नवीन सेंट्रल प्रोसेसिंग लाइन का उदघाटन किया। जैविक उत्पादों एवं खाद्य प्रसंस्करण पर लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

राज्यपाल पटेल को बताया गया कि सेंट्रल प्रोसेसिंग लाइन यूनिट में फूड प्रोसेसिंग और जैविक उत्पादों का प्रशिक्षण स्थानीय किसानों, एफपीओ तथा कृषि विद्यार्थियों को दिया जायेगा।  यूनिट की स्थापना राज्य शासन, राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय एवं नाबार्ड के सहयोग से की गई है। चीफ जनरल मैनेजर नाबार्ड श्रीमती एस. सरस्वती भी मौजूद थी।