नई दिल्ली
केंद्र सरकार ने देश के मेडिकल डिवाइस (चिकित्सा उपकरण) क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है।वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस क्षेत्र में उन्नत परीक्षण उपकरणों के लिए सरकार की ओर से 100 प्रतिशत फंडिंग सहायता देने की घोषणा की है।सरकार के इस फैसले का एसोसिएशन आफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री (एआइएमईडी) ने दिल खोलकर स्वागत किया है।
एआइएमईडी ने इस प्रतिबद्धता को भारत को वैश्विक विनिर्माण हब बनाने की दिशा में एक बड़ा 'गेम-चेंजर' बताया है।संगठन का कहना है कि यह निर्णय भारत के मेडिकल डिवाइस उद्योग को न केवल लागत के मामले में, बल्कि तकनीक और गुणवत्ता के मामले में भी दुनिया में सबसे आगे खड़ा करेगा।
मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत के साथ MSME के लिए संजीवनी
घोषणा पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए एआइएमईडी के फोरम समन्वयक राजीव नाथ ने कहा कि यह घोषणा भारत को दुनिया के शीर्ष पांच मेडिकल डिवाइस विनिर्माण केंद्रों में शामिल करने के हमारे साझा दृष्टिकोण को मान्यता देती है।
अब तक उन्नत परीक्षण बुनियादी ढांचे की कमी एक बड़ी बाधा थी। 100 प्रतिशत सरकारी सहायता मिलने से भारतीय निर्माता अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतर सकेंगे।
उन्होंने आगे कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त कामन टेस्ट सुविधाओं से छोटे और मध्यम उद्योगों के साथ-साथ स्टार्टअप्स को सबसे ज्यादा फायदा होगा।
इससे विदेशी लैब पर निर्भरता कम होगी, परीक्षण की भारी लागत से राहत मिलेगी और परीक्षण रिपोर्ट को वैश्विक स्तर पर स्वीकार्यता मिलेगी।
'ब्रांड इंडिया' को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
राजीव नाथ ने इस कदम को सरकार का एक "समझदारी भरा निवेश" करार देते हुए कहा कि इसका सीधा लाभ 'ब्रांड इंडिया' की साख मजबूत करने के रूप में मिलेगा। संगठन ने उम्मीद जताई है कि इस नीति के क्रियान्वयन में उद्योग जगत के सुझावों को शामिल किया जाएगा ताकि वास्तविक जरूरतों के अनुसार सुविधाओं का विकास हो सके।

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