मोबिस इंडिया फाउंडेशन ने पर्सनलाइज़्ड मोबिलिटी सॉल्यूशंस के ज़रिए 60 व्हीलचेयर यूज़र्स को सशक्त बनाया
भोपाल, एक सुलभ, समावेशी और समान समाज बनाने के भारत के सामूहिक विज़न को आगे बढ़ाते हुए, हुंडई मोबिस इंडिया की कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) शाखा, ‘मोबिस इंडिया फाउंडेशन’ ने आज मध्य प्रदेश में अपनी एक्सेसिबिलिटी पहल शुरू की। इसके तहत, फाउंडेशन ने अपने प्रमुख कार्यक्रम “एक्सेसिबिलिटी एंड फ्रीडम – व्हीलचेयर यूज़र्स का मोबिलिटी असीस्टिव डिवाइस द्वारा सशक्तीकरण” के अंतर्गत भोपाल में 23 व्हीलचेयर यूज़र्स को उनकी ज़रूरत के हिसाब से तैयार किए गए मोबिलिटी असीस्टिव डिवाइस बांटे।
यह वितरण कार्यक्रम भोपाल के कम्पोजिट रीजनल सेंटर (CRC) में आयोजित किया गया। यह सेंटर भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत ‘दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग’ (DEPwD) का एक प्रमुख संस्थान है। यह कार्यक्रम दिव्यांगजनों के लिए सुलभ और स्वतंत्र जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में सरकारी संस्थानों, कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) और सहायक तकनीक (assistive technology) के क्षेत्र में काम करने वाले इनोवेटर्स की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इस कार्यक्रम में भोपाल के डॉ अजय खेमरिया- आयुक्त दिव्यांग जन, मध्य प्रदेश मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। उन्होंने लाभार्थियों को उनकी ज़रूरतों के हिसाब से तैयार किए गए मोबिलिटी डिवाइस (चलने-फिरने में मदद करने वाले उपकरण) बांटे और कार्यक्रम के दौरान उनसे बातचीत भी की।
भोपाल का यह कार्यक्रम मध्य प्रदेश में मोबिस इंडिया फ़ाउंडेशन की ‘एक्सेसिबिलिटी आउटरीच’ की शुरुआत है। इसके ज़रिए राज्य भर में व्हीलचेयर इस्तेमाल करने वाले 60 लोगों को उनकी ज़रूरतों के हिसाब से मोबिलिटी समाधान (आवाजाही में मदद करने वाले साधन) मिलेंगे। भोपाल के कार्यक्रम के बाद, 13 अगस्त 2026 को इंदौर में एक खास वितरण कार्यक्रम में 37 और लोगों को कस्टमाइज़्ड मोबिलिटी डिवाइस दिए जाएंगे, जिससे राज्य भर में फ़ाउंडेशन का दायरा और बढ़ेगा।
मध्य प्रदेश का यह प्रोग्राम मोबिस इंडिया फ़ाउंडेशन की ₹6.3 करोड़ की राष्ट्रीय ‘एक्सेसिबिलिटी पहल’ का हिस्सा है। यह पहल आठ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 600 व्हीलचेयर इस्तेमाल करने वालों को पर्सनलाइज़्ड नियोफ़्लाई (NeoFly) व्हीलचेयर और नियोबोल्ट (NeoBolt) मोटर-पावर्ड अटैचमेंट उपलब्ध कराकर मदद कर रही है। यह सिर्फ़ मोबिलिटी डिवाइस बांटने का प्रोग्राम नहीं है, बल्कि यह एक लंबे समय का निवेश है, इसका मकसद दिव्यांग लोगों को शिक्षा, रोज़गार, उद्यमिता, स्वास्थ्य सेवा, खेल और सामुदायिक जीवन में ज़्यादा सक्रिय रूप से भाग लेने में सक्षम बनाना है।
यह प्रोग्राम नियोमोशन, जो इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी मद्रास में इनक्यूबेटेड असिस्टिव टेक्नोलॉजी कंपनी है, के साथ पार्टनरशिप में चलाया जा रहा है और इनोवेटिव और पर्सनलाइज़्ड मोबिलिटी सॉल्यूशन डिज़ाइन करने के लिए डेडिकेटेड है। हर लाभार्थी को मोबिलिटी डिवाइस मिलने से पहले पूरी क्लिनिकल जांच और शरीर का डिटेल्ड माप लिया जाता है, जिससे यह पक्का होता है कि हर व्हीलचेयर को सबसे अच्छा पोस्चर, आराम, सुरक्षा और लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए अलग-अलग कस्टमाइज़ किया गया है।
हर लाभार्थी को एक कस्टमाइज़्ड नियोफ़्लाई व्हीलचेयर मिलती है, जिसे अलग-अलग क्लिनिकल और फंक्शनल ज़रूरतों के हिसाब से कई पर्सनलाइज़ेशन ऑप्शन के साथ बनाया गया है। जब इसे नियोबोल्ट के साथ जोड़ा जाता है, जो इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी मद्रास में बनाया गया एक पेटेंटेड मोटर-पावर्ड अटैचमेंट है, तो व्हीलचेयर कुछ ही सेकंड में सड़क पर चलने लायक पर्सनल मोबिलिटी गाड़ी में बदल जाती है, जिससे उपयोगकर्ता सुरक्षित और अकेले लंबी दूरी तय कर सकते हैं और साथ ही फिजिकल मेहनत भी काफी कम हो जाती है।

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