नईदिल्ली
नवंबर 2016 और मार्च 2017 के बीच नोटबंदी के बाद 900 करोड़ रुपये की जब्ती हुई, जिसमें 636 करोड़ रुपये की नकदी और आयकर विभाग द्वारा चलाए गए तलाशी और जब्ती अभियानों के जरिए करीब 7,961 करोड़ रुपये की अघोषित आय शामिल है।
वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, नोटबंदी से न केवल काले धन का पता चला, बल्कि इससे कर संग्रह में भी वृद्धि हुई और कर आधार का विस्तार हुआ।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, नोटबंदी की कवायद के बाद जब सरकार ने 8 नवंबर, 2016 की शाम को अचानक 9 नवंबर की आधी रात से 500 और 1,000 मूल्यवर्ग के करेंसी नोटों को बंद करने की घोषणा की, तो 2017-18 के लिए शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह में 2016-17 में 18 प्रतिशत की वृद्धि दर देखी गई, जो पिछले सात वित्तवर्षो में सबसे अधिक थी।
वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, विमुद्रीकरण के सकारात्मक प्रभाव के कारण देश में कर अनुपालन में वृद्धि हुई, क्योंकि 2017-18 के दौरान, व्यक्तिगत आयकर अग्रिम कर संग्रह में 23.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि 2016-17 में व्यक्तिगत आयकर स्व-मूल्यांकन कर में 29 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
सूत्रों ने कहा कि इससे पता चलता है कि नोटबंदी और उसके बाद आयकर विभाग द्वारा बैंक जमा डेटा के उपयोग का गैर-कॉर्पोरेट और व्यक्तिगत करदाताओं द्वारा स्वैच्छिक कर भुगतान पर बड़ा प्रभाव पड़ा।
इसके अलावा, 2017-18 के दौरान दाखिल किए गए आयकर रिटर्न (आईटीआर) की संख्या में 25 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की गई, जो पिछले पांच वर्षो में हासिल की गई उच्चतम दर थी।
2017-18 के दौरान, 2016-17 के दौरान 85.51 लाख की तुलना में 2017-18 के दौरान नए आईटीआर फाइलरों की संख्या लगभग 1.07 करोड़ थी, जो विमुद्रीकरण के परिणामस्वरूप औपचारिक चैनलों में नकदी के हस्तांतरण के कारण अनुपालन के उच्च स्तर को दर्शाता है।
2017-18 के दौरान कॉर्पोरेट करदाताओं द्वारा दायर रिटर्न की संख्या में 17.2 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल की गई। यह 2016-17 में 3 प्रतिशत और 2015-16 में 3.5 प्रतिशत की विकास दर से पांच गुना अधिक था।

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