ठंड का मौसम आते ही कई लोग यह मानने लगते हैं कि रम पीने से शरीर में गर्मी आती है और सर्दी-खांसी या दर्द में आराम मिलता है। इसी वजह से इंटरनेट पर भी लोग अक्सर यह सर्च करते हैं कि क्या रम पीना फायदेमंद है या सर्दी-जुकाम में कौन-सी शराब बेहतर रहती है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस सोच को पूरी तरह गलत बताते हैं।
एक कैंसर सर्जन के अनुसार, रम या किसी भी तरह की शराब को दवा मानना एक बड़ी भूल है। उन्होंने कहा कि अगर रम दवा होती, तो उसकी बोतल पर साफ-साफ यह चेतावनी नहीं लिखी होती कि शराब पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। रम से कुछ लोगों को जो राहत महसूस होती है, वह अस्थायी होती है और इसका बीमारी ठीक होने से कोई सीधा संबंध नहीं है।
डॉ. बताते हैं कि अल्कोहल पीने से शरीर में तुरंत एक अलग तरह की फीलिंग आती है और मूड में बदलाव होता है। इसी वजह से व्यक्ति को थोड़ी देर के लिए सर्दी-खांसी या दर्द से राहत जैसा एहसास हो सकता है। लेकिन असल में शराब शरीर को अंदर से नुकसान पहुंचाती है। इसके सेवन से डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है, क्योंकि अल्कोहल शरीर से पानी खींच लेता है। साथ ही, इससे संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि रम जैसी शराब में अल्कोहल की मात्रा ज्यादा होती है और कई शोधों में यह साबित हो चुका है कि शराब पीने से कैंसर का खतरा बढ़ता है। चाहे रम हो या कोई दूसरी शराब, इससे स्वास्थ्य को फायदा नहीं, बल्कि नुकसान ही होता है। लंबे समय तक शराब का सेवन लिवर, किडनी और अन्य अंगों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
डॉ. का कहना है कि वह पिछले 20 वर्षों से कैंसर मरीजों का इलाज कर रहे हैं और उनके अनुभव में शराब या सिगरेट कभी भी दवा नहीं हो सकती। यह केवल एक भ्रम है कि शराब पीने से बीमारी ठीक हो जाती है। इसलिए लोगों को चाहिए कि वे शराब को दवा समझने की गलती न करें और सर्दी-खांसी जैसी समस्याओं के लिए सही मेडिकल सलाह और उपचार अपनाएं।

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